देश-दुनिया में मशहूर है अजमेर की राठौड़ बाबा और गणगौर की सवारी

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सोलथम्बा फरिकेन की ओर से ईसर गणगौर (राठौड़ बाबा) की पारम्परिक सवारी निकाली गई। सवारी का कई जगह पुष्पवर्षा, इत्र छिड़ककर स्वागत हुआ। देर रात तक सवारी देखने लोग नया बाजार और आस-पास के इलाकों में जुटे। लोगों ने जयकारे लगाए।

पूजा-अर्चना के बाद शाम 7 बजे राठौड़ बाबा और गणगौर की पारम्परिक सवारी गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। इस दौरान खाटू श्याम बाबा की झांकी भी साथ चली। सवारी खटोला पोल, व्यास गली, होली धड़ा कड़क्का चौक, नया बाजार चौपड़, आगरा गेट गणेश मंदिर पहुंची। खटोला पोल से आगरा गेट पहुंचने में करीब 6 घंटे का वक्त लगा। यहां कुछ देर विश्राम के बाद सवारी वापस आगरा गेट से चौपड़, घी मंडी, सर्राफा पोल होते हुए मोदियाना गली पहुंची।
फूलों और इत्र की सुगंध

राठौड़ बाबा और गणगौर की सवारी का विभिन्न स्थानों पर स्वागत हुआ। फूलों और इत्र की सुगंध से पूरा इलाका महक उठा। नया बाजार, लक्ष्मी चौक और आस-पास के क्षेत्र में आकर्षक सजावट की गई। इस दौरान डॉ. एम. एल. अग्रवाल, राजेंद्र मित्तल, संजय अत्तार आदि ने व्यवस्थाएं संभाली।
बैंड की धुनों पर थिरके

सवारी के दौरान परम्परानुसार बैंड वादकों के बीच प्रतियोगिता हुई। शहर के सभी बैंड ने सवारी के दौरान नए और पुराने गीतों की धुनें पेश की। इनमें ओ पवन वेग से उडऩे वाले..., अरे जा रे हट नटखट..., पंख होते तो उड़ आती रे..., भंवर म्हने पूजण दयो गणगौर.. और अन्य धुनों पर लोग थिरक उठे। बैंड वादन सुनने के लिए लोग देर रात तक नया बाजार और अन्य इलाकों में डटे रहे। मालूम हो कि गणगौर पर मधुर सुनकर ही लोग विभिन्न समारोह के लिए बैंडवादक बुक करते हैं।
मेहंदी लच्छा वितरण आज
मोदियाना गली में सवारी के पुन: पहुंचने पर रातीजगा हुआ। यहां शुक्रवार सुबह मेहंदी लच्छे और प्रसाद का वितरण किया जाएगा। मालूम हो कि लोग इस मेहंदी को शुभ मानते हुए घर ले जाते हैं।

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